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संजोया था
संजोया था जिस पल को मैंने आज बिखरा - बिखरा नजर आने लगे क्या हुआ अब हम जो तेरे नैनों में चुभने लगे मोहब्बत थी हमसे तो शिकायत भी हमी से कर�
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लिखने की गुंजाईश,कहां,। इस सफर ,पर बिना छत के बरसात बहुत हैं,।
मैं ,उस मुकाम ,पर हूँ,।जहाँ,कलम कुछ बोले ,लोग सवाल बहुत ,करते हैं,। मगर साये में कौन है,ख्याल बहुत रखते हैं,। कविता ✍️
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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम्हारे अंदर खुद दिखावे का मोहब्बत भाड़ा पड़ा हुआ है।लेकिन तुम दूसरों से सच्ची मोहब्बत की अपेक्षा कर रहे हो।
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इश्क ए इजहार हम क्या करें
इश्क ए इजहार हम क्या करें रात की वीरांगी में घूमते हैं इधर - उधर दिन के उंजाले में छिपते हैं इधर - उधर क्या बताए क्या हाल हो गया है मेरा म
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समझ न सकें
नादान था ए दिल कुछ समझ न सकें वो वफा न कर सकें हम बेवफा न बन सकें। धन्यवाद
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दिल ही था
दिल का हाल क्या बयां करें ऐ दिल ही था जो धोखा दे दिया इसका क्या इंसाफ करें। धन्यवाद
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हम
हम तेरे इश्क में ऐसे मसरूफ हो गए हमें जमाने की खबर ही नहीं सरे आम बदनाम हो गए हमें अपने आन की परवाह ही नहीं। धन्यवाद
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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
लोग गिरी हुई चीज को उठा लेते है।लेकिन एक बार नजर झुक गई तो उठाने में जन्मों लग जाति है।
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मुलाकात
हम महफ़िल में यूं आ गए कि तन्हाई से फिर कभी मुलाकात न हो पाई झूठे शान - शौकत में यूं डूब गए कि गरीबी से फिर कभी मुलाकात न हो पाई। धन्य
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आए हो तो
दुनियां में आए हो, तो कुछ करके जाना ऐ कहना आसान है पर ईमानदारी से दो पैसा कमाकर अपना नाम रोशन करना ऐ बहुत मुश्किल है धन्यव�
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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब का सब एक दूसरे के खुदा बने हुए है। लेकिन खुद को खुदा कौन बनाएगा।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सिगरेट के तरह जिंदगी हो गई है जो धीरे धीरे कर जिंदगी खत्म हो रही है।
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