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शायरी
Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
बहुत अजीब विडंबना है यहां लोग जनाजे को कांधे पर उठाए फिरते है।लेकिन जो जिंदा है उसकी कब्र खोदने में लगे हुए है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम अपने अम्ल पर ही ध्यान दो शाहब तुम्हारी अम्ल तुम्हें ही जन्नत में ले जायेगी लोगों को नहीं।क्योंकि तुम खुदा नहीं जो सर्टिफिकेट ब�
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
बहुत भोले लोग है यहां मोहब्बत चेहरे देख कर लेते है।लेकिन वफा लोगों में ढूंढते है जिसे अपने अंदर ही ठूंस रखे है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जब जरूरत आ जाए तो मोहब्बत भी बढ़ जाती है लोगों की।लेकिन अगर जरूरत न हो तो मोहब्बत निकाल कर बुराई ढूंढते फिरते है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मैं खुदा और खुद में विश्वास रखता हूं क्योंकि जिस खुदा ने विश्वास बनया है उससे उम्मीद पैदा होती है।लेकिन लोग अरमान जगा कर विश्वास का ग
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब इबरत हासिल करने के लिए लोगों को मौत दे कर भी जिंदा कर दूं तो तुम्हारी मोहब्बत वैसा नही बन पाएगा।जैसा मोहब्बत तुम अपनी चाहत को पूरा
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मोहब्बत भले ही फ्री मिल जाती है लोगों को।लेकिन कर्ज तो जिंदगी झंड कर के ही चुकानी पड़ती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
खाने के तीन वक्त की रोटी पहनने के लिए तीन जोड़ा कपड़ा और कुछ नही भगवान।क्योंकि जादे उन नालायक को चाहिए जिन्हें तेरे कर्मों पर सब्र नह
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
दुनियां से अपोजिट चलता हूं।क्योंकि सीधा चलने लग जाऊं तो मेरी वे बसी मेरी एटीट्यूड को खत्म कर देती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब नियत बदल रही है मेरी पहचान मिटाने की।अब क्या मिटाएंगे वो मेरी पहचान को जिसे खुद पहचान भीख में मिली हो।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम्हारी काबिलियत तक लोग भले न पहुंच पाए। लेकिन तुम्हारी तरह मोकाम हासिल करने के बजाए लोग तुम्हारी बुराइयों को ढूंढ कर तुम्हें बर्�
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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
बहुत अजीब लोग है यहां जाति के नाम पर बिबाद फसाद ढूंढते रहते है।लेकिन मोहब्बत दूसरे कास्ट वाले लोग से ही कर लेंगे।
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