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आना-जाना रहना नहीं सख़ी रे, गांव बेगाना-ए-बेजार सख़ी रे, जग झूठा नाता नहीं कोई अपना सैंया बसे सांस-ए-सांस सख़ी रे।। -मोती read more >>
शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिंदगी, पर चुप इसलिए हूं कि; जो दिया तूने, वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता... read more >>
दिल पर आकर लगती थी जब भी वो कुछ कहती थी। और हर बात पर यही कहती थी कि तुम अब बदल गए हो।। -दिनेश कुमार कीर read more >>
ज़िदंगी को हमेशा खुल कर और जितना हो सके खुश होकर जियो, नहीं पता जो आज है वो कल हो ना हो। -दिनेश कुमार कीर read more >>
"गम" "इस जहान में गम न होता तो,शराबें महखानों का क्या होता,बोतलें खाली होती,हाथों में जाम न होता,लबों पर उनका नाम न होता,निगाहों में उनके � read more >>
किस किस से जाकर कहती ख़ामोशी का राज, अपने अंदर ही ढूंढ रही हूँ अपनी ही आवाज। -दिनेश कुमार कीर read more >>
चाहतें भी नफ़रतें भी क्या ये झमेला है। ज़िन्दगी बस चार दिन का ही तो मेला है।। मुश्किलों में साथ देता कौन अब किसके। हर कदम पर शख़्स वो ख़ुद � read more >>
यह मोहब्बत है ठगों की बस्ती, एक पल में बदल देती है हस्ती; आशिक़ रहते है इश्क़ में बैचेन, इश्क़ जाता है उजाड़ कर बस्ती...! read more >>
फ़िसलती ही चली गई, एक पल, रुकी भी नहीं; अब जा के महसूस हुआ, रेत के जैसी है ज़िंदगी। read more >>
पढ़ लेती है मेरे मुख को, सुन लेती है मौन दुख को, रूठे रूठे से सुख को, मना मना कर लाती है... जाने कहां से 'मां' हुनर लाती है...! read more >>
एक नजर ,जब उसे देखा हल्की सी हंसी , होठों पर ठहर गई ।। जिन्दगी के कुछ बिते पलो को जब याद कर ,पन्नों पर कुछ कुतेरने लगे । घीरे-घीरे वो काग� read more >>
मुझ से नफरत करनी ही है तो दिल खोल कर करो, लेकिन एक बार जो सुना उसकी तहकीक ज़रूर कर लो के वो सच है या नहीं, चाहे बताने वाले तुम्हारा बेहद � read more >>
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