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ख़ामोशी-तन्हाई कि चादर ओढ़े सो रही है
एक दिन मैं एक गली से गुज़रा , एक चौखट पर लिखा था। थोड़ा तकल्लुफ़ कीजिएगा जनाब, अपने कदमों की आहट को थोड़ा ख़ामोश रखिएगा। अन्दर ख़ामोशी तन्हा�
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रिश्ते मन का-जिस्म की दुनिया
जिस्म की दुनिया अक्सर वहा मायने नहीं रखना जहां मन जुड़े हो, और जो रिश्ते मजबूरी के नीव पर बंधे जाते हो वहां लाख कोशिशें के बाद भी मन नही�
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मुस्कान जिंदगी की
जिंदगी की कसमकस मे ऐसे उलझे हैं, सभी की चेहरे पर झूठी अदाकारी के मुस्कान लिए कर रहे हैं।
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सागर से गहरा- दिल में अनंत का बसेरा
सागर से गहरा, अनंत-ए-बसेरा, दिल-ए-राज़ जान ले सत् नाम जान ले।। -मोती
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मैंने फूलों का दर्द देखा है
"मैंने तितली की नब्ज़ पकड़ी है, मैंने फूलों का दर्द देखा है, मैंने अक्सर बहारे शफक़त में, सबज़ पत्तों को ज़र्द देखा है... " -दिनेश कुमार
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ये चले पवन- मन मयूर मोरा नाचे
ये चले पवन मन मयूर मोरा नाचे, ये धरती-गगन संग मन मोरा नाचे, तू-आ-जा पिया मन मयूर मोरा नाचे प्रीत-ए-पुकारे तुझे मन मोरा नाचे।। -मोती
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ज़ुबान सम आवेग- नहीं संसार में
आवेग-ए-जुबान सम नहीं संसार में, महाभारत तो कहीं शांति संसार में। -मोती
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जीवन एक खोज है- शांति की
जीवन शांति की खोज है और शांति में ही स्थापित है -मोती
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शुभचिंतक तुम्हारा तुम्हारे अंदर- जगत का वो राम है
शुभचिंतक- तुम्हारा तुम्हारे अंदर, जगत का- वो राम है तुम्हारे अंदर,, जाग तू इंसा- जगाने वाला तुम्हारे अंदर, जगत का- तारणहार तुम्हार�
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स्पष्टता की ज्योति-समस्त संसार की ज्योति
स्पष्टता की ज्योति ज्योतियों की ज्योति समस्त संसार की ज्योति वही जीवन ज्योति।। -मोती
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प्रथम जरूरी कार्य को करना- जो कर सको सो ही है करना
प्रथम जरूरी कार्य को करना, जो कर सको सो ही है करना,, हर असंभव ताला की कुंजी यही, सहज-ए-सफ़लता का राज़ यही।। -मोती
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युग युगत कारण ये तारणहार- जग ये जीवन प्राण उसका रूप
युग-युगत कारण-ए-तारणहार, जन-ए-जगत का वह तारणहार,, कण-कण में रहता वह तारणहार, जग-जीवन प्राण रूप ईश्वरा।। -मोती
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