Rambriksh Bahadurpuri 23 Nov 2024 ग़ज़ल समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri #Gazal #dukhi man per gazal#Rambriksh Bahadurpuri ki gazalen 22076 0 Hindi :: हिंदी
मन ही मन में रो गये
सम्मान सबके आज कल
खोखले सब हो गयें
मर गये अरमान मानों
हौंसले सब खो गयें
मिट गये सब प्रेम जैसे
अनमने सब सो गये
जिंदगी का बोझ बद्तर
हर कोई यूं ढो गये
कह सका न सुन सका
पीड़ा किसी का हर कोई
दर्द अपने आप का खुद
आंसुओ से धो गये
हैं फेरते नजरें सभी
अपनों से अपने आप का
बन्द पलकों में कसक ले
मन ही मन में रो गये
रचनाकार -
रामबृक्ष बहादुरपुरी
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...