SHUBHAM PATHAK 22 Aug 2026 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत 791 0 Hindi :: हिंदी
प्रेम कहानी सिर्फ़ फिल्मों में अच्छी लगती है प्रेम कहानी सिर्फ़ फिल्मों में अच्छी लगती है, असल ज़िंदगी में प्रेम करके देखना… हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक टूटा हुआ दिल मिलता है। फिल्मों में मोहब्बत आसान होती है, दो दिल मिलते हैं, कुछ वादे होते हैं, कुछ खूबसूरत मुलाक़ातें होती हैं, और कहानी एक ख़ुशहाल अंत पर खत्म हो जाती है। मगर असल ज़िंदगी में… प्रेम करके देखना, यहाँ हर मुलाक़ात के बाद बिछड़ने का डर रहता है, हर वादे के पीछे टूट जाने का खौफ रहता है, और हर "हमेशा साथ रहूँगा" के बाद अकेले रह जाने की रात आती है। जिसे हम अपनी दुनिया समझ लेते हैं, कभी वही इंसान हमें अपनी दुनिया से निकाल देता है। जिसकी एक आवाज़ सुनने के लिए हम घंटों इंतज़ार करते हैं, कभी वही हमारी खामोशी तक नहीं समझ पाता। मोहब्बत में इंसान सिर्फ़ किसी को चाहता नहीं, वह धीरे-धीरे अपना सब कुछ सौंप देता है— अपना वक्त, अपनी नींद, अपनी मुस्कान, अपने सपने, और सबसे बढ़कर… अपना दिल। फिर जब वही दिल टूटता है, तो आवाज़ नहीं होती, कोई खून नहीं निकलता, कोई ज़ख्म दिखाई नहीं देता… बस इंसान अंदर से थोड़ा-थोड़ा मरता रहता है। लोग कहते हैं— "भूल जाओ उसे…" काश मोहब्बत कोई किताब होती जिसका आख़िरी पन्ना पढ़कर बंद कर देते। काश यादें भी तस्वीरों की तरह होतीं, जिन्हें फाड़कर कूड़ेदान में फेंका जा सकता। मगर कुछ लोग दिल में इस तरह उतर जाते हैं कि उन्हें निकालने की कोशिश में इंसान खुद ही बिखर जाता है। कभी रातों को नींद नहीं आती, कभी भीड़ में भी अकेलापन लगता है, कभी किसी अनजान चेहरे में उसी का चेहरा दिखाई देता है, और कभी बिना किसी वजह के आँखें नम हो जाती हैं। सबसे दर्दनाक बात तो यह है कि जिस इंसान के लिए हमने दुनिया से लड़ने की हिम्मत जुटाई थी, एक दिन उसी के सामने हम अपनी मोहब्बत हार जाते हैं। फिर समझ आता है— प्रेम सिर्फ़ पाने का नाम नहीं, कभी-कभी प्रेम का मतलब किसी को खोकर भी उसे दिल से चाहना होता है। इसलिए अब जब कोई पूछता है— "मोहब्बत कैसी होती है?" मैं मुस्कुराकर कहता हूँ— मोहब्बत वो एहसास है जो जिंदगी को खूबसूरत भी बनाता है और उसी जिंदगी से जीने की वजह भी छीन सकता है। प्रेम कहानी सिर्फ़ फिल्मों में अच्छी लगती है, जहाँ दर्द के बाद भी हीरो-हीरोइन मिल जाते हैं… असल ज़िंदगी में प्रेम करके देखना, कभी-कभी कहानी पूरी नहीं होती, बस एक इंसान रह जाता है— यादों के साथ, कुछ अधूरे वादों के साथ, और उस शख़्स के इंतज़ार में जो शायद कभी लौटकर नहीं आएगा। और तब समझ आता है… मोहब्बत मौत नहीं होती, मगर जब मोहब्बत अधूरी रह जाए, तो इंसान हर दिन अपने अंदर कुछ न कुछ खोता रहता है। शायद इसलिए प्रेम कहानी सिर्फ़ फिल्मों में अच्छी लगती है… असल ज़िंदगी में प्रेम करके देखना, यहाँ कभी-कभी मौत से नहीं, अपने ही टूटे हुए वजूद से मुलाक़ात होती है। 🥀 ✍️✍️शुभम पाठक ✍️✍️