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आलस्य छोड़िए

Poonam Mishra 30 Mar 2023 कहानियाँ समाजिक प्रत्येक मनुष्य को अपना कार्य स्वयं करना चाहिए और आलस्य छोड़ना चाहिए 80567 0 Hindi :: हिंदी

बहुत समय पहले की बात है,
 एक बार महात्मा गांधी से एक व्यक्ति देशभक्ति की प्रेरणा से ओतप्रोत, होकर और देशभक्ति
 के लिए अपना जीवन समर्पित करने के विचार से बापू से मिलने के लिए गए ,|और उन्होंने बापू से कहा" कि "बापू मैं देश की सेवा करना चाहता हूं "मुझे आप आज्ञा दीजिए' मैं क्या करूं?
 मुझे कुछ आप बताइए? मेरा मार्ग प्रशस्त करिए?
 उस समय बापूजी आश्रम में सफाई कर रहे थे |
उन्होंने कहा कि तुम कल से आश्रम में झाड़ू लगाओगे|
 और अपने बाथरूम की सफाई तुम स्वयं करोगे |
युवक पहले तो झिझका   उसे लगा अरे यह क्या काम है "
मुझे तो देश भक्ति की सेवा करनी है |
अपने देश के लिए कुछ करना है
 परंतु बापू की आज्ञा का पालन करना अपना धर्म समझकर उसने उनके निर्देशों के अनुसार काम करना शुरू कर दिया |
कुछ ही दिनों के बाद उस व्यक्ति को उक्त कार्य सहज " स्वाभाविक लगने लगा |
उसको अपना कार्य स्वयं करते हुए एक विचित्र प्रकार का संतोष का अनुभव महसूस होने लगा|
 वह गंभीरतापूर्वक सोचने लगा कि
 बापू जी सही कहते हैं कि हर व्यक्ति को अपना काम स्वयं करना चाहिए| अन्य व्यक्ति से कराना हिंसा है|
 क्योंकि अन्य व्यक्ति के श्रम का लाभ उठाना शोषण है 
और शोषण ही हिंसा है 
हम लोग अपने शरीर की सुख-सुविधा के इतनी दास क्यों बन गए हैं ?
जो स्वाबलंबी बनने के प्राकृतिक गुड़ की उपेक्षा करते रहते हैं !
क्या यह सच नहीं है कि ईश्वर ने हमें कार्य करने के लिए दो हाथ दिए हैं जो लोग अपने हाथों से कार्य न करके धर्म पालन में बाधक बनते हैं |वे उस व्यक्ति के समान हैं जिनके आंगन में नदी तो बहती है और वह प्यासा मर जाता है |
मनुष्य चाहे तो क्या नहीं कर सकता है 
परंतु आलस्य ने उसको इतना दुर्बल एवं कामचोर बना दिया कि उसकी समस्त शक्तियां पंगु बनकर रह गई हैं 
अपने कार्य के लिए अन्य किसी का सहारा लेने का उदाहरण हमारे आजकल के युवा वर्ग में भी देखे जा सकते हैं 
और उन बच्चों में भी जो स्कूल पढ़ने जाते हैं !
ज्यादातर बच्चे अपना होमवर्क अन्य छात्रों से करवाते हैं!
 इसके विपरीत जो छात्र अपना काम स्वयं करते हैं वे सदैव आत्मविश्वास से पूर्व रहते हैं 
और परीक्षा की तिथियां की प्रतीक्षा उत्साह पूर्वक करते रहते हैं 
और जो दूसरों से अपना वर्क  कराते हैं वह परीक्षा के आते ही भयभीत होते हैं 
और कैसे नकल कर कि हम पास हो जाए इसका प्रयास करते हैं
 गांधी जी द्वारा उस व्यक्ति से कराए गए कार्य का कहानी बताने का मेरा यही तात्पर्य है 
कि अपना काम स्वयं करें आलस्य करने वाला व्यक्ति सदैव अभाव में बना रहता है
 यहां तक कि सब कुछ होते हुए भी वह उससे वंचित बना रहता है कहानी का आलसी जो कि आपने सुना होगा यहां तक सोचता है, कि उसके पास पड़ा हुआ फल कोई उसके मुंह में आकर डाल दे, कहने का तात्पर्य है 
आलस्य मनुष्य को जीवन में आगे बढ़ने नहीं देता और वह विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों का सामना करता है और अपने हर कार्य के पूरा ना होने पर दूसरों को दोष देता है ,
या अपने भाग्य को कोसता है
 जबकि इन सब स्थिति के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होता है,
 इसलिए सभी मनुष्य को अपने आलस्य का त्याग करना चाहिए, और हर प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्य में लग जाना चाहिए ,
और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए ,
क्योंकि आलस्य मनुष्य की उन्नति में बाधक होता है

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