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गुरुओं का आदर सम्मान करना चाहिए

Chanchal chauhan 03 Oct 2026 कहानियाँ धार्मिक गुरु हमारे जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाते है, उनके प्रति अपना आचरण सही रखो, उनका आदर सत्कार करो। 6281 0 Hindi :: हिंदी

एक गाँव में गुरु जी श्री मद्भागवत कथा के लिए निकले। गाँव वालों से बातचीत की कथा के लिए। कुछ ने तो कहा ठीक है, कुछ की इच्छा नहीं हुई। गुरु जी ने कहा," कथा सात दिन की होती है। यही पर हमें भोजन की व्यवस्था करनी होगी। मै तो भोजन ग्रहण नहीं करता। जो मेरे साथ में है पण्डित जी तबला मास्टर, साज वाले और भी जो है उनको भोजन कराना होगा। उस गाँव की औरतों से ये बात पूंछी  गई। औरतों ने मना कर दिया। हमारी बस की बात नहीं है, खाना खुलाना। किसी ने कहा, हमारे पैरों में दर्द रहता है,तो किसी ने कहा हमारे हाथों में दर्द रहता है, किसी ना किसी कोई ना कोई बहाना लगा दिया। गुरु जी ने कहा, "कोई बात नहीं,ठीक है, हम बाहर भोजन करा लायेगे। बाहर हॉटल पर खुला लायेगे। गाँव वालों ने कुछ नहीं कहा। गुरु जी को तो कथा करना थी। उन्होंने 108 गाँव में श्री मद्भागवद् कथा करना संकल्प लिया था।गुरू जी ने पहले दिन श्री मद्भभागवत कथा सुभारम्भ किया पहले दिन की कथा विराम पर ली। उसके बाद वह अपने शिष्य को बाहर हॉटल पर खाना खुलने के लिए ले गये।वे वहाँ से गाँव में आ गये। देखा दो चार आदमी खड़े है। गुरु जी ने उनसे ठहरने की व्यवस्था पूंछी तो उन आदमी ने कहा, ठहरने व्यवस्था तो नहीं की। एक ने कहा मैं व्यवस्था करता हूँ। गुरु जी के साथ और जो थे, वे तो पंडाल में ही सो गये। गुरु जी के सोने के लिए एक हॉल की व्यवस्था की जिसमें भूसा भरा था। गुरु जी ने मन विचार किया चलो कोई नहीं कथा करने लिए ये भी सह लेते है। गाँव वालों अच्छी व्यवस्था करनी थी वे गुर है। गुरु की सेवा करनी चाहिए। अगर कोई महमान भी घर पर आये तो उसकी भी सेवा करनी चाहिए धर्म ये था चाहे वह व्यक्ति खुद उस हॉल में सोता गुरु जी के लिए सुन्दर व्यवस्था करता। उस हॉल में मच्छर भी बहुत लग रहे थे। गुरु जी को सारी रात नींद नहीं आई।अगले दिन फिर गुरु जी ने कथा की। गुरु जी कथा करने के बाद गाड़ी में बैठने लगे, तभी एक सज्जन व्यक्ति बोला, गुरु जी आप इस समय आप कहाँ जा रहे हो। गुरु जी बोले इन बच्चों को भूख लगी है इनको बाहर खाना खिला आऊ। वह व्यक्ति बोला आप हमारे होते बाहार  खाना खाओगे।कल आपने कहाँ खाना खाया था। गुरु जी ने कहा, "कल भी बाहर खाकर आये थे। वह व्यक्ति बोला बड़ी शर्म की बात है, इतना बड़ा गाँव होकर किसी ने आपको खाना नहीं खिलाया। गुरु जी ने कहा, " सबने मना कर दिया था। हमारे बस बात नहीं इतने सारे को खाना खिलाना। उस व्यक्ति ने कहा, "मैं कल कही बाहर गया था। वरना ऐसी नोबत नहीं आती। जब तक आप यहाँ कथा करोगे सात दिन तक मैं आपको भोजन कराऊगा। और कल आप कहाँ ठहरे थे। गुरु जी ने कहा, ये बच्चे तो यही पर जहाँ पर कथा की पंडाल में ही सो गये थे। वह व्यक्ति बोला आप गुरु जी। गुरु जी बोले भूसा का हॉल था आधा खाली था उसमें ठहरने व्यवस्था हुई थी हमारी। यह बात सुनते ही उस व्यक्ति की आंखों में आंसू आ गये।वह कहने लगा, धिक्कार है हम गाँव वालों पर। इतने आदरणीय गुरु जी को ऐसी स्थिति में रखा । मैं आपसे गाँव वालों की तरफ से माफी मांगता हूँ।आप सात दिन तक मेरे यहाँ ठहरना। गुरु जी ने कहा, "ठीक है।" उस व्यक्ति ने गुरु जी के ठहरने के लिए बहुत सुंदर व्यवस्था की।गुरु जी के मुखारविंद से श्री मद्भभागवत कथा का सुनकर गाँव के लोगों की प्रतिदिन संख्या बढ़ने लगी। गुरु जी अपने ज्ञान का मोति बिखेरे, गाँव वालों के लोग जो अंधेरे में थे उन्हें रोशनी दिखाई। श्री मद्भभागवत कथा ज्ञान से भक्ति मार्ग, गलत राह पर भटके को राह दिखाई। गाँव के लोग श्री भागवद् कथा की ज्ञान में तहरने लगे। वह गुरु जी को पहचान गये।उन गाँव के लोगों को कथा बहुत अच्छी लगी। कथा का समापन हुआ। गुरु जी गाँव से जाने लगे, तो गाँव के लोग गुरु जी माफी मांगने लगे।औरतें रोने लगी। साथ दिन के साथ में एक लगाव हो गया।हमने आप के साथ बहुत बुरा किया।हमने आपको गलत समझा। जो व्यक्ति पहले दिन की व्यवस्था की वह बहुत शरमिंदा था।गाँव के लोग कहने लगे , दूसरे गाँव के लोग कह रहे थे। भागवद् कथा कुछ नहीं, सब पैसे लूटने की स्कीम है। आपने तो हम से कुछ नहीं लिया। हम लोगो के चढ़ाये में आ गये थे।गुरु जी ने कहा "कोई बात नहीं। "गुरुओ का ह्रदय बड़ा उदार होता है।वह विनम्र होते है। बड़ा दु:ख होता है, जब कोई ज्ञान बांटने वालों को गलत श्रेणी में लाकर रख देते है। लोग ज्ञान से दूर भागते है मोह, माया, मनोरंजन की चीजों में फंसे रहते है। यदि कही कम्पनी, नोटकी  हो रही हो लोगों की भीड़ लग जाती है, लोग पैसे दवादव उड़ाते है। ज्ञान और धर्म के नाम पर पैसे देने से पीछे हटते है। 
कम्पनी, नाटक, मनोरंजन, 
ये सब भटकाते है, 
ज्ञान की कथा, 
धर्म, कर्म सिखाती है, 
जो हमारी जीवन नैया को तारती है। 

जपो नाम राधेकृष्ण का, 
गुरु की शरण ले लो, 
भटकेगे तो पछ्ताओगे, 
सब छूट जायेगा यही पर, 
कुछ साथ ना ले जा पाओगे। 

आदर सम्मान करो गुरुओं का, 
हमारे जीवन में ज्ञान की गंगा बहाते है, 
इनके ज्ञान के बिना भटकते हैं अंधेरों में, 
गुरु ज्ञान की रोशनी दिखाते है।

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