नागमणि कुमार सिंह 24 Sep 2026 कहानियाँ समाजिक खुशी के आँसू 978 0 Hindi :: हिंदी
कहानी शीर्षक: खुशी के आँसू अमर बाजार से आकर खाना खाकर घर में सो गया I गर्मी का महीना था I कमरे में पंखा लगा हुआ था I पंखा तेज से चल रहा था I अमर को गहरी नींद आ गया था I अचानक उसकी नींद खुलती है I किसी के ज़ोर-ज़ोर से रोने की आवाज आ रही है I उसे लग रहा है कि यह आवाज उसके अपने ही घर से आ रहा है I उसे उठने की हिम्मत नहीं हो रहा है I मन में बहुत सारे विचार उमड़ रहे हैं I कौन रो रहा है ? क्यों रो रहा है ? किसी को चोट लगी क्या ? कहीं से बुरी खबर आई क्या ? यहाँ तक कि वह सोच रहा है कि किसी की मौत हो गयी क्या ? किसी की कोई दुर्घटना हुई क्या ? तमाम प्रश्न बिजली की गति से उसके मन में चल रहा है I जब रोने की आवाज में थोड़ा कमी हुई तो अमर बिस्तर पर से उठता है I कमरे से बाहर आता है I सामने अपने बड़े मामा जी को चौकी पर बैठे देखता है I अमर मामा जी को नमस्कार कहता है और वही बैठ जाता है I तब उसकी नजर माँ पर पड़ती है वह घर के एक कोने में रोई जा रही है I अमर ने अपने मामा जी से पूछा क्या बात है ? क्या कोई बुरा समाचार हैं ? माँ क्यों रो रही है ? तब मामा जी ने कहा,” कोई बुरी खबर नहीं है I अभी तो हम आकर बैठे है और तुम्हारी माँ मुझे देखकर रोने लगी I अमर को बहुत गुस्सा आया I उस समय मामा के कारण अमर ने माँ से कुछ नहीं कहा और घर के बाहर चला गया I थोड़ी देर बाद अमर वापस घर आया तो पाया की मामा जी जा चुके थे I अमर ने अपने माँ से पूछा कि तुम मामा के आते ही ज़ोर ज़ोर से क्यों रोने लगी ? अमर के माँ ने जबाव दिया,” मामा इस घर में बहुत दिन बाद आए थे I सुख-दुख के दिनों को याद करते हुए खुशी के आँसू आ गए I” अमर ने कहा ठीक है खुशी के आँसू आ गए तो इतने ज़ोर से रोने कि जरूरत क्या है कि हमे अचानक नींद खुल जाए ? हम ऊपर के कमरे में सो रहे थे I तुम्हारी रोने कि आवाज से हमे अचानक नींद खुली I हमारे मन में तरह-तरह के बुरे विचार आ रहे थे I हमे घबराहट हो रहा था I तो अमर की माँ ने कहा यदि हमें पता होता कि तुम ऊपर के कमरे में सो रहे हो तो मैं ज़ोर ज़ोर से नहीं रोती I अमर माँ की जबाव सुनकर अवाक रह गया I लेखक : नागमणि कुमार सिंह ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------