नागमणि कुमार सिंह 22 Sep 2026 कहानियाँ समाजिक सेवाभाव 442 0 Hindi :: हिंदी
कहानी शीर्षक : सेवाभाव सविता की नजर दीवार घड़ी पर अटकी हैं I 2 बज चुके हैं I अभी तक उदय स्कूल से घर नहीं आया हैं I उसे 15 मिनट पहले आ जाना चाहिए I उसके मन में अनेक सवाल उठ रहे है I कभी वह दरवाजे की ओर झाँकती है तो कभी बालकनी से नीचे ताकती हैं I अब घड़ी की सुई 2 बजकर 30 मिनट पर चली गयी हैं I अचानक उसके मन में आया कि रवि को कॉल करते हैं I लेकिन रवि ने कॉल नहीं उठाया I सविता की दिल की धड़कन तेज हो गयी I तभी दरवाजे की घंटी बजी और सविता दरवाजे की ओर भागती हैं I दरवाजा खोलती है I सामने उसका पति रवि और उसका बेटा उदय खड़ा हैं I सविता को जान में जान आ गयी I सविता ने पूछा,” आज इतना देर क्यों हो गयी?” रवि ने कहा,” पहले घर के अंदर चलते है, फिर सारी बात बताता हूँI” तीनों घर के अंदर गए I रवि ने कहा,” हम रोज की तरह ठीक समय पर स्कूल के सामने खड़ा था I उदय कहीं दिख नहीं रहा था I हम स्कूल के पूरे कैम्पस घूमने के बाद भी वह नहीं मिला I हम वापस उसी स्थान पर आ गए I तब उदय दूर से आते दिखा I हमने गुस्से में इसे बहुत भला-बुरा कहा I हम यहाँ परेशान है और माँ घर में परेशान होगी I तुम आराम से घूम रहे हो I” तभी उदय ने कहा,” पापा, हम घर चलकर बताते हैं I घर पर मम्मी इंतेजार कर रही होगी I” उदय जल्दी से स्कूटर पर बैठ गया और घर की ओर रवाना हो गया I सविता ने कहा,” उदय, अब सारी बात बताओ I उदय ने कहा,” जब हमारे स्कूल की छुट्टी हुई I हम उसी स्थान पर खड़े थे जहाँ पापा लेने आते है I तभी एक बुजुर्ग साइकिल सवार अचानक सड़क पर गिर गए I कोई मदद को आगे नहीं आ रहा था I हमने साइकिल उठाई I अपने स्कूल बैग की बोतल से पानी पीने को दिया I उनको दोनों पैर में चोट लगी थी I खून भी निकल रहा था I” बुजुर्ग ने हमसे बोले ,” बेटा हमारा घर कुछ ही दूरी पर है I कृपा करके हमे घर तक छोड़ दोगे I” उदय को उस पर दया आ गया I उसने साइकिल लेकर बुजुर्ग के साथ उसके घर तक छोड़ दिया I लौटते वक्त बुजुर्ग ने पूछा,” बेटा, तुम्हारा नाम क्या हैं? तुम किस क्लास में पढ़ते हो ?” उदय ने कहा,” मेरा नाम उदय है और मैं कक्षा पाँच में पढ़ता हूँ I” इतना बोलकर उदय उसी स्थान पर आ रहा था जहाँ उसे पापा लेने आते हैं I सविता ने कहा,” उदय, जब कोई मदद को आगे नहीं आ रहा था तो तुम्हें आगे जाने की क्या जरूरत ? तुमको उसी जगह रहकर पापा का इंतेजार करना चाहिए I हमारी तो जान निकली जा रही थी I” रवि ने कहा,” चलो जो हो गया सो हो गया, आगे से ध्यान रखना I” उदय खाना खाने के बाद ट्यूशन पढ़ने चला गया I कुछ दिन बाद रवि का मोबाइल की घंटी बजती है I उधर से आवाज आता है हम माननीय राज्यपाल का पी. ए बोल रहा हूँ I आपके बेटा का चयन वीरता पुरस्कार के लिए हुआ है I 26 जनवरी को आपके बेटे उदय को गांधी मैदान में वीरता पुरस्कार दिया जाएगा I आप सपरिवार आमंत्रित हैं I घर में अचानक खुशी की लहर दौड़ गयी I सविता और रवि को अपने उदय पर गर्व हो रहा था तो दूसरी ओर उदय को घटना वाले दिन भला-बुरा कहने का पछतावा भी I 26 जनवरी को माता-पिता के साथ उदय गांधी मैदान पहुँचा I उदय का नाम वीरता पुरस्कार के लिए बुलाया गया और लोगों को बताया गया की सी. सी. टी. बी. में साफ दिख रहा है की उदय बिना किसी हिचक के एक बुजुर्ग की मदद कर रहा है जबकि बहुत से लोग देख कर भी नजरंदाज कर रहे हैं I उदय तेज कदमों से स्टेज की ओर बढ़ रहा था तो दूसरी ओर तालियों की आवाज भी तेज होती जा रही थी I लेखक : नागमणि कुमार सिंह ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------