Disha Shah 30 May 2025 कविताएँ समाजिक 23099 0 Hindi :: हिंदी
आप को मेहनत करनी ही होगी, तब ही जीवन में फसल मिलेगी। कुछ किए बिना कुछ नहीं मिलता, सिवाय पछतावे के कुछ नहीं टिकता। पापड़ तो बेलने ही पड़ेंगे, तभी सपनों के रंग खिलेंगे। बैठे-बैठे चाहो सब कुछ पा जाना, तो यह केवल भ्रम है, सच्चाई से बहाना। हर बीज को बोना पड़ता है, धूप-बरसात में रोना पड़ता है। तब जाकर मिलती है हरियाली, वरना सूनी रह जाती खेतों की डाली। जो सुबह से शाम तक लगे रहते हैं, वही लोग मंज़िल तक पहुंचते हैं। कर्म ही पूजा है, यही सच्चा ज्ञान, मेहनत से ही बनता है इंसान महान। थक कर रुकना नहीं है कोई हल, जितनी मेहनत उतना बेहतर फल। अगर आप चाहें तो इसे किसी मंच, किताब, या स्कूल प्रतियोगिता के लिए सजाकर भी पेश किया जा सकता है।