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आशीवार्द

Bholenath sharma 17 Jun 2024 कविताएँ समाजिक 58736 0 Hindi :: हिंदी

आशीष सदा वो देती रहती है           बच्चों पर प्यार लुटाती रहती है ।               अधरों को रखकर , भाल पर माँ                  जुग जुग जियो लाल , ये कहती है ।

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