Anilkumar Rathwa (Sameer) 20 Sep 2025 कविताएँ समाजिक अंधेरी रात के बाद सुबह तय है.... 22661 0 Hindi :: हिंदी
अंधेरी रात के बाद सुबह तय है, कठिनाइयाँ हमें मज़बूत बनाने आती हैं। हर आँधी बस राह दिखाने आती है, जो गिरते हैं, वही उठकर इतिहास रचते हैं। आसमान का सूरज हर बार चमकता है, भले बादल कितनी बार उसे ढक लें। इंसान की कोशिशें कभी बेकार नहीं जातीं, सपने टूटकर भी हक़ीक़त बन जाती हैं। जो थककर बैठ जाए, वो पीछे रह जाता है, जो संघर्ष करे, वही आगे बढ़ जाता है। ज़िंदगी की राह आसान नहीं होती, पर हर मुश्किल हमें नई सीख दे जाती है। इसलिए हारकर मत रुकना ऐ मुसाफ़िर, तेरा मंज़िल से गहरा नाता है। याद रख—अंधेरी रात के बाद सुबह तय है, हर दर्द के पीछे एक नया उजाला छिपा है।