MD SHAYEED ALAM 11 Apr 2026 कविताएँ देश-प्रेम कविता 10116 1 5 Hindi :: हिंदी
भगत सिंह आज अगर हमें देखते होंगे, हमें देखकर वह यही सोचते होंगे, क्या हो गई है मेरे देश की हालत ? क्यों फैली है हर ओर जेहालत? बट गया है मुल्क में मेरा, बट गए हैं सारे हिंदुस्तानी। कोई किसी को पाकिस्तानी बोले, कोई किसी को कहे खालिस्तानी। पता नहीं है लोगों को क्या? यह सब है नेताओं की है कारस्तानी। उनकी कुर्सी के चक्कर में, पीस रहा है हर एक हिंदुस्तानी। भगत सिंह आज अगर हमें देखते होंगे, हमें देखकर वह यही सोचते होंगे । हम पर तो जुल्म फिरंगी करते थे, आज अपने ही करते हैं जुल्म की ठेकेदारी। सबको अपने धर्म की पड़ी है, नहीं है देश के प्रति वफादारी। अनपढ़ नेता देश चलाएं, पढ़े लिखे बेरोजगार रह जाएं। क्या यही है वह आजादी? जिसके लिए चुनी थी हमने खुद की बर्बादी। हंसते हुए चढ़े थे हम सूली पर, ताकि आज ना आए तुम लोगों पर। भगत सिंह आज अगर हमें देखते होंगे, हमें देखकर वह यही सोचते होंगे।।
3 months ago