Anshika Agrawal 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य हिंदी Kavita , कविता , प्रेरक कविता , प्रेरणादायी कविता , motivational Hindi poem , motivational poem , inspirational poem 69497 0 Hindi :: हिंदी
हाथ में हाथ धरकर बैठने से कुछ नहीं मिलता।
सुना है, परिंदो को भी उड़ने के लिए पंख खोलना पड़ता है
यह जिंदगी है साहब!
यहां मेहनत का बीज जो बोता है ,
फल का स्वाद भी वही चख पता है।
वरना नसीब का रोना रोया जाता है।
मेहनत करने वाला हाथो की लकीरों को भी बदल डालता है
वक्त का इंतजार नहीं वह अपना वक्त खुद ही बनाता है।
किसी के रहमो का मोहताज नहीं होता ,
मेहनत की सूखी रोटी भी वह बड़े मजे से खाता है।
अंशिका अग्रवाल