MD SHAYEED ALAM 05 Nov 2025 कविताएँ समाजिक कविता हर बार फिर से लड़ा हूं मैं 25439 0 Hindi :: हिंदी
यूं तो जिंदगी ने मारी है मुझे ठोकरें हजार, हर बार गिरा ,संभला ,फिर से उठा हूं मैं। हर बार फिर से लड़ा हूं मैं। यूं तो जिंदगी ने मारी है मुझे ठोकरें हजार, पर न मानी है मैंने कभी हार, हर बार गिरा ,संभला ,फिर से उठा हूं मैं। हर बार फिर से लड़ा हूं मैं।