आकाश अगम 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #कौन लेता थाह #हिन्दीकविता #poetry #hindi kvita 53491 0 Hindi :: हिंदी
छोड़ते विष बाण , जलती क्रोध रूपी आग
प्रतिक्रिया दे कर लगा लूँ स्वयं यश पर दाग
राग बिन, मुख से निकलता अनवरत ही फाग
नष्ट हो जाता हृदय से उस समय अनुराग।।
लड़ झगड़ कुंठा हृदय में भर गया जब लेट
युद्ध छिड़ता बैठ जाता हूँ पकड़ कर पेट
सो रहे थे लोग मेरा रतजगा उस रात
हो रहा था और कुछ हल्की हुई बरसात।।
भूँख से व्याकुल मग़र खाने न देता क्रोध
हर विजय के मार्ग में सबसे बड़ा अवरोध
देख दुख, कर बन्द पलकें सो गया संसार
तब वही दो कौर लाये; कर रहे थे वार।।
और बोले पुत्र! मेरी भूल जाओ भूल
क्रोध में , आवेश में , मैंने चुभाये शूल
निज तनय से ही न बोलेंगे , बताओ कौन
है हमारी बात सुन कर भी रहेगा मौन।।
सुन वचन पिघला हृदय में भर गया अनुताप
हाय! मुझसे हो गया कितना बड़ा ये पाप
क्रोध से जन्मी अनल ने था जलाया बाग
जन्म जल से अब हुआ अनुताप की है आग।।
बन गया कवि; इस तरह से हो रहा था दाह
कौन ले पाता दुखी मन की जगत में थाह।।