Nisha Kumari 25 Jun 2026 कविताएँ समाजिक सोच और लिखने की कला 1818 0 Hindi :: हिंदी
बरसों पहले यही सोचती थी कि लोग कैसे इतना गहरा सोचते है कैसे लिख लेते है सागर जैसे अल्फ़ाज़ आज आप ही लिख रही हूं ।। तब जाना है कलम की इस ताकत को जिसे ना तो किसी ने रोक सका है ना ही जंजीरों ने बांधा है कैसे लिख लेते है आज ये जाना है।। रचनाएं कभी पूरी नहीं होती बातें अधूरी सी लगती है जब सोचने लग जाओ कैसे लिख लेते है आज ये जाना है।। सोच का ये बीज कभी न करना शून्य इन लफ्जों में ही है तेरा मूल्य कुछ न सही तो लिखते रहना अच्छा लिख लेते हो आज ये जाना।।