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Nisha Kumari
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तोता और मैना की कहानी
एक आदमी था जिसके घर के आंगन में बहुत सारे फलों के पेड़ लगे हुए थे। वही एक अमरूद के पेड़ की डाल पर एक तोता बैठा करता था। पास ही दूसरी डाल पर �
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राखी एक प्यारा त्यौहार
राखी एक प्यारा सा त्यौहार भाई बहनों का प्यार आपार साथ रहकर खूब हंसते गाते एक दूसरे पर जान लुटाते।। बचपन की कहानी है निराली साथ में �
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होस्टल लाइफ़ की यादें बेहिसाब
होस्टल लाइफ की यादें है बहुत खास ढेर सारी खुशियां और यादें बेहिसाब।। अपनी दोस्ती भी थी बहुत लाजवाब पढ़ना लिखना शरारतें भी करते दिन र
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बचपन का प्यार सफर
कितना आसान सा सफर है बचपन प्यार दुलार से भरा हुआ लड़कपन न किसी की फिकर न कोई डर बचपन होता है सबसे बेखबर।। खेलना कूदना मस्ती बहुत करना
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खुद को समझ लेना कभी
स्त्री के मन को समझ लेना कभी अंतरात्मा की उथल पुथल को भी सुन लेना कभी इतना भी कठिन नहीं होता स्वयं को समझना फुरसत मिले तो खुद को समझ ले�
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हम चार सहेलियां
हम सहेलियां हैं चार हमें नहीं है किसी का डर आपस में है प्रेम की एक डोर साहस भी है हम में अपार।। जब भावनाएं करती हैं अनेकों प्रहार कभी �
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रात सा अपना नाम
कहते थे कि अपने नाम का असर अपने जीवन पर न होने देना रात सा अपना ये जीवन न कर लेना अंधेरे में खोना नहीं अपना हुनर अंधेरे से ही पूरा होता �
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रात्रि हो निशा हो
कहते थे कि अपने नाम का असर न होने देना रात सा अपना ये जीवन न कर लेना खो नहीं देना यू ही अपना हूनर अंधेरे सा अपना जीवन न कर लेना।। तुम ऊष
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लिखना आज है जाना
बरसों पहले यही सोचती थी कि लोग कैसे इतना गहरा सोचते है कैसे लिख लेते है सागर जैसे अल्फ़ाज़ आज आप ही लिख रही हूं ।। तब जाना है कलम की इ�
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स्वयं को पहचान
क्या खोया क्या है पाया जमाने ने यही गिनवाया आते हैं सब लोग अकेले ही फिर भीड़ में चलना क्यों सिखाया।। अपनी पहचान अपना अस्तित्व मिटे �
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