शरद भूषण मोंगरा 27 Apr 2026 कविताएँ धार्मिक मैं यथार्थ सत्य हूं, मैं रूह हूं, आत्मा 9702 0 Hindi :: हिंदी
"रूह"मैं क्षणिक क्षण भुंगर नहीं मैं यथार्थ सत्य हूं किन्तु तुमको दीख ता जो मैं वही असत्य हूं' हूं चराचर में रमा क्या कोई मुझको जानता है'? हूं धरा पर अंश जिसका कोई मुझे पहचानता है? हूं मैं क्या? किस भेद में हूं? मैं सदा अकथ्य में हूं। मैं हूं व्यापक व्योम धरती ब्रह्मांड के रहस्य में हूं, "रूह" हूं, आध्यात्म के पिण्ड खण्ड तथ्य में हूं। लेखक साहित्यकार शरद भूषण मोंगरा