AJAY KUMAR JOSHI 10 Feb 2025 कविताएँ धार्मिक अध्यात्मिक , शक्ति , धार्मिक , जोश, आत्मविश्वास 26182 0 Hindi :: हिंदी
मन की तरंगों को अब रोकना होगा
इन्द्रिय घोड़ो को अब रोकना होगा
रोकना होगा काम-तृष्णा की हर शाजिश को
पल पल बदलते विचारो की कला बाजी को।।
रोकना होगा
उद्वेग, लालसा जो हर पल तरसाती है
मन की हर करवट कई विचार लाती है
मन चंचल चित चोर की अब नहीं चले दूंगा
में अपने मन को अब नही बदलने दूंगा ।।
सुकून नही मिलता भले दुनिया बहुत बड़ी है
सभी की राहों में मुसीबते सीना ताने खड़ी है
माया का पर्दा तो अब हटाना ही होगा
है मेरे मन तुझे मेरे काबू में आना ही होगा।।
है मेरे मन तुझे मेरे काबू में आना ही होगा।।
खिन्नता ओर नकारे भावो से छुटकारा
पा ना ही होगा
योगा प्राणायाम आसन असटांग
दिनचर्या में लाना ही होगा .....
शरीर की हर नस में जब
प्राण का संचार होगा
कुतर्क अभी भरे पड़े है
तब न कोई विचार होगा
तब हर मानव अपना सा लगने लगे गा
बिता हुआ आज सपने सा लगने लगे गा
मरा हुआ जीवन जीवंत बना ही होगा
है मेरे मन तुझे मेरे काबू में आना ही होगा।।
है मेरे मन तुझे मेरे काबू में आना ही होगा।।
प्रत्याहार, ध्यान, धारणा उपयोग में लाने ही होंगे
प्राणायाम के साथ कई बंध लगाने ही होंगे
तटस्थ होकर ,
योग से अहंकार का जब मर्दन होगा
तो
है मेरे मन तुझे मेरे काबू में आना ही होगा।। है मेरे मन तुझे मेरे काबू में आना ही होगा।।
Ajay always : सत्य की खोज में