Anilkumar Rathwa (Sameer) 15 Oct 2025 कविताएँ समाजिक "मत तोड़ो अगर बना नहीं सकते" 16702 0 Hindi :: हिंदी
अगर किसी वस्तु को बनाने की क्षमता तुम्हारे पास नहीं, तो उसे नुकसान पहुँचाने का हक भी तुम्हारे पास नहीं। क्योंकि जो बनाना नहीं जानता, वो तोड़ने का मूल्य कभी नहीं समझ पाता। हर वस्तु, हर रिश्ता, हर भावना — ईश्वर की रचना का एक रूप है, जिसे जोड़ने में बरसों लगते हैं, पर तोड़ने में बस एक क्षण पर्याप्त है। कितनी बार देखा है — लोग किसी की मेहनत का मज़ाक उड़ाते हैं, पर खुद कुछ नया बनाने से डर जाते हैं। आलोचना तो हर कोई कर लेता है, पर निर्माण वही करता है, जिसमें सच्ची समझ और सहनशीलता होती है। किसी की कारीगरी में दोष मत ढूँढो, क्योंकि तुम नहीं जानते वो कितने आँसुओं और सपनों से बनी है। किसी के विश्वास को मत तोड़ो, क्योंकि तुम नहीं जानते वो कितनी बार टूटा और फिर भी जुड़ा है। रिश्तों की बात हो या विचारों की, कभी विनाशक मत बनो, सृजनशील बनो। क्योंकि ईश्वर ने हमें बनाया है निर्माण के लिए, न कि विनाश के लिए। जो चीज़ जोड़ नहीं सकते, उसे मत छेड़ो, जो मन समझ नहीं सकते, उसे मत फेरो। कभी किसी की रचना पर हँसना नहीं, क्योंकि सृजन करने वाला हर व्यक्ति ईश्वर का ही प्रतिबिंब होता है। याद रखो — बनाना धैर्य माँगता है, और तोड़ना अहंकार। धैर्य से संसार चलता है, अहंकार से बस बिखरता संसार। इसलिए, अगर बना नहीं सकते, तो मत तोड़ो, अगर सुधार नहीं सकते, तो मौन रहो। क्योंकि सम्मान देना भी एक सुंदर निर्माण है — जो हर दिल में अपना घर बना लेता है।