Aaditya singh 14 Sep 2026 कविताएँ समाजिक मेरा भारत 1372 0 Hindi :: हिंदी
मेरा भारत महान हैं काम इसका विश्वकल्याण हैं। कहलाती है ये महापुरूषो की धरती फिर भी नहीं करती अहंकार, इसके आशय जो लिये हो गये उसके कल्याण, गाँधी,गौतम और क्रातिकारी जिसकी महिमा जग मे न्यारी, मुझे जो स्पर्श करते है दुश्मन वो भी बन जाते हें दोस्त, दिन-रात की मेहनत की बल से जग मे मेरा नाम हैँ, यहाँ की नदियां भी कितनी स्वच्छ है जो भी एक बार देखे इसकी शोभा देखते ही रह जाये, देवी देवताएँ भी यहाँ इसकी शोभा देखने आते हें, बहती है यहाँ गंगा की धार उसके चारो बगल बसा भारत महान। झुकाये नहीं झुकती हैं,सतायें सह लेती हैं, 200 वर्ष की इस गुलामी में न जाने कितने वीर हुए शहीद, मेरे यहाँ के लोग भी कितने होते हें ईमानदार विदेशी भी करते हें इस देश की गुणगान, बीच से निकली गंगा की धार बहती हिन्दुस्तान के आर-पार, कारगिल युद्ध भी हुआ यहाँ पे फिर भी डटा रहा हिन्दुस्तान, जो भी पर्यटक आते हें घुमने भारत की महिमा गाते हें, इसकी सभ्यता को देखर मुग्ध हो जाते हें सारे जंहान, भारत भाग्य विधाता हैं जण-गण-मण इसकी गाथा हैं, हर साल आती हैं यहाँ प्रचंड बाद. न जाने कितने मुसीबत आ जाते हें हर साल, गंगा,यमुना और सरस्वती दिन-रात इसकी सेवा करती,स्वामी विवेकानंद जैसे बेटे जिनके वीदेशी मुग्ध हो गये थे उनपे, गुलामी के इतने वर्षो में इनके सपूतो ने कभी न मानी हार, पूरब में बंगाल की खारी,पश्चिम मे अरब सागर,उत्तर मे हिमालय और दक्षिन में हिन्द महासागर सदा इसकी शोभा बदातें हें, स्वामी दयानंद जैसे सपूत ने बदायी इसकी शान, यहाँ की नारी भी कितनी सुंदर हैं देखते ही मुग्ध हो जाती हैं दुनिया, देश से लेकर दुनिया तक सारे जग मे होती चर्चा इसकी, कभी तुर्को ने,कभी अंग्रेजो ने तो कभी आतंकवादियो ने लुटटे रहे हिन्दुस्तान फिर भी कम नहीं होती हैं इसकी शान, लोग यहाँ साधारण से जीते हें फिर भी चेहरे पर संतोष हैं, यहाँ की धरती को पावन करने हर युग मे जन्म लेते हें भगवान(राम, महात्मा गाँधी,स्वामी विवेकानंद,स्वामी दयानंद इत्यादि।) मेरा भारत सबसे महान।