महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 21 Jun 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत 3590 0 Hindi :: हिंदी
मेरी चांदना कशी बिसरू तांउ प्यारी हंउ तू से मेरी चांदना तेरे अलावा दुनिया मा मुके कासीकी याद आंदी ना। गाल मा तेरो कालो तिल घायल करेंदों मेरो दिल तेरी बंठाया के सामणी कोई मुके भांदी ना। कशी बिसरू............... सात जनम को रिश्ता होलो जियण-मरणों की कस्मा खायी आधी बाटा मुई छोड़ी के काई ना पूरी तांई निभाई । तेरो रूसणों, मेरू मनाणांे हाथ पकड़ी के घुमणे जाणांे तेरे बिना अब जिन्दगी मा प्यार की बाता कोई लांदी ना। कशी बिसरू............... बोया बाबा तेरे मना करेंदे फिर भी मुके मिला करेती मेरे प्यारो की खातिर चांदना तू दूनिया से ना डरेती। कोइके नटी तू दिलो जलाई के सुपिने मा भी अब आंदी ना कशी बिसरू तांउ प्यारी हंउ तू से मेरी चांदना बार त्यौहार सब सुणे हईगे सुणी पड़ी मेरी जवानी रोई रोई के तेरी याद मा सुखी गे आंख्यूं को पाणी। ऋतुंऐ सारी बदली गोई पर तेरी याद जांदी ना कशी बिसरू तांउ प्यारी हंउ तू से मेरी चांदना। तेरे अलावा दुनिया मा मुके कासीकी याद आंदी ना। रचनाकार- महेश्वर उनियाल