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महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी

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My Articles

अपना गांव कितना सुन्दर अपना गांव यहां मिले वृक्षों की छांव। प्रकृति की है, छटा निराली चारों तरफ है हरियाली नहीं कोई कोलाहल भारी � read more >>
‘‘बेरोजगारी का सफर’’ यारों मै पढ़ता ही जा रहा हूं, उम्र में बढ़ता ही जा रहा हूं । घर वाले मेरी शादी के लिए अड़े है, मेरे सारे सपने मेर� read more >>
‘‘साम्प्रदायिकता’’ भारत भूमि में हम जन्में यारों, यह देश हमारा अपना है, उद्धार करो इस मात्र भूमि का यही हमारा सपना है । इस दुनिय� read more >>
चलो एक वृक्ष लगायेें आओ चलो एक वृक्ष लगायें मानव होने का फर्ज निभायें, सावन के हम गीत गायें धरा के यौवन को महकायें। पेड़ नहीं है, स्वा read more >>
‘‘ठोकरें’’ जब तक न लगे ठोकर कुछ भी न पता होता है, आसान है, सब दुनिया में बे फिक्र होके सोता है। ख्वाबों में ही रहता है और सपने संजोता � read more >>
‘‘प्रियतम आने वाला है’’ सात रंगो से सजा मौसम बड़ा निराला है, सुना है मैने आज मेरा प्रियतम आने वाला है। कोयलिया भी गा रही है नाच रहे ह read more >>
’’लहर उठी जवानी में‘‘ जानबूझ कर किया है तूने या हुआ नादानी में, मार के पत्थर कहां चली तू ठहरे हुए पानी में। मेरी दुनिया तो यारों बस read more >>
मेरी चांदना कशी बिसरू तांउ प्यारी हंउ तू से मेरी चांदना तेरे अलावा दुनिया मा मुके कासीकी याद आंदी ना। गाल मा तेरो कालो तिल घायल कर� read more >>
‘‘देखो मेरी नानी आयी’’ नानी आयी नानी आयी देखो मेरी नानी आयी, भर-भर के वो चीजें लायी गोदी उठाकर मुझे खिलायी। मम्मी मुझको दूध पिलाती read more >>
“मेरा हमसफ़र” जब जवां हुऐ थे जज्बात हमारे हुए एक दिन पीले हाथ हमारे, फिर घर आयी उनकी बारात हमारे कदमों से कदम मिला के चले वो साथ हमारे। read more >>
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