Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

एक और भगत सिंह बनकर आया था...

Ujjwal Kumar 22 Jun 2026 कविताएँ देश-प्रेम #justicebharatsingh #एक और भगत सिंह बनकर आया था... #writerujjwal 1004 0 Hindi :: हिंदी

एक और भगत सिंह बनकर आया था,
अन्यायों से जो टकराया था।
सच की मशाल लिए हाथों में,
अंधेरों से न घबराया था॥

झुकना जिसकी फ़ितरत न थी,
सत्य ही जिसका नारा था।
जन-जन की पीड़ा को जिसने,
अपना जीवन माना था॥

सत्ता से निर्भय प्रश्न किए,
जन-जन की आवाज़ उठाई।
अन्याय की हर दीवार से,
सच की मशाल टकराई॥

आज समय यह पूछ रहा है,
क्या सच कहना दोष हुआ?
जो व्यवस्था से प्रश्न करे,
क्या उसका यही प्रतिफल हुआ?

इतिहास स्वयं उत्तर देगा,
सत्य कभी झुकता नहीं।
जनहित की राहों पर चलने वाला,
युग-युग तक अमर रहता है॥

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: