Ujjwal Kumar 22 Jun 2026 कविताएँ देश-प्रेम #justicebharatsingh #एक और भगत सिंह बनकर आया था... #writerujjwal 1004 0 Hindi :: हिंदी
एक और भगत सिंह बनकर आया था, अन्यायों से जो टकराया था। सच की मशाल लिए हाथों में, अंधेरों से न घबराया था॥ झुकना जिसकी फ़ितरत न थी, सत्य ही जिसका नारा था। जन-जन की पीड़ा को जिसने, अपना जीवन माना था॥ सत्ता से निर्भय प्रश्न किए, जन-जन की आवाज़ उठाई। अन्याय की हर दीवार से, सच की मशाल टकराई॥ आज समय यह पूछ रहा है, क्या सच कहना दोष हुआ? जो व्यवस्था से प्रश्न करे, क्या उसका यही प्रतिफल हुआ? इतिहास स्वयं उत्तर देगा, सत्य कभी झुकता नहीं। जनहित की राहों पर चलने वाला, युग-युग तक अमर रहता है॥