Bholenath sharma 30 May 2024 कविताएँ समाजिक तेरे दीवाने थे मधुशाला 45351 0 Hindi :: हिंदी
हमको जो कहते हो तुम , क्यों पीते हो हाला , पुरखे भी पीते थे ,तेरे दीवाने थे मधुशाला ।
नये नये है हम , हमको कहते तुम दूर रहो बहुत अधिक है आर्कषित करती ,अपने दीवाने को मधुशाला |