Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

हौसले

Kishor Kumar Bhardwaj 26 May 2026 कविताएँ अन्य हौसले 2626 0 Hindi :: हिंदी

थक गया हूँ सफ़र में मगर रुकना नहीं सीखा,
इन बुझते हुए ख़्वाबों को फिर से मचलने दो।
रात ने छीन ली है चमक मेरी निगाहों की,
सुबह बनकर उभरूँगा, बस सूरज निकलने दो।।
लौट कर आऊंगा शाखाओं पर हरियाली लेकर,
पतझड़ की जद में हूँ, ज़रा मौसम बदलने दो..
जो बिखर गए हैं रास्तों में, उन्हें फिर से समेट लूँ,
ज़िंदगी की धूप को थोड़ा और पिघलने दो।।
अभी ख़ामोश हूँ तो ये मत समझना हार गया,
वक़्त की तह में हूँ, मुझे फिर से निकलने दो।।
✍️के.भारद्वाज

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: