एक नन्ही सी कली हूं,
मां तेरे आंचल में ही पली हूं,
सिर्फ एक इंसाफ के लिए चली हूं,
वह इंसान जो हक है हमारा ,
फिर क्यों ?
फिर क्यों ?
नोच दिय� read more >>
डांट कर तो सब अपनापन दिखाते हैं,
लेकिन जो डांट कर मना सके,
वो शख्स चाहिए।
शक तो हर कोई करता है मुझ पर ,
लेकिन जो अटूट विश्वास दिखा सके ,
व� read more >>
हिंदी हमारी प्रिय भाषा है,
सीधी सादी शब्दों से सुसज्जित,
कविता, कहानी, दोहा, अलंकार,
सोरठा, छंद, चौपाई ,रस सबसे संगठित हैं, सबको अपनी मेल � read more >>
वतन में लोकतंत्र का राज है ;
छिपा कई राज़ हैंं ,
आ पड़ा चुनाव -
खड़ा अंचल के मीर ;
है पहलवान वीर ,
उम्मीदवार एक से एक बड़ा ;
यह पहलवान अपना ठप्पा read more >>