मैं ये नहीं कहती हूँ कि बाकी भाषाएँ नेक नहीं
अंग्रेजी बोलना अच्छा है पर हिन्दी त्यागना ठीक नहीं
—त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’ read more >>
ये आँख-आँख नही है, गहरा दरिया है,
नज़र बदले नही हैं, बस बदला नज़रिया है।
दुनिया के हर रहम में कुछ ख़ास छिपा है।
कहने को सब सही हैं, नही तो सभी � read more >>
//... मेरी दुल्हन ...//
मुझे मिले कोई ,
लड़की ऐसी
जो लगती हो ,
फूलों जैसी...!
रंगत उसकी ,
सांवली हो
चंचल हो वो ,
तितली जैसी...!
मृगनयनी सी ,
आंख� read more >>
जुल्फों की घटाओं में क़मर खिली है -----
देख के छुपना , छुपके देखना -----
इसी अदाओं में छिपी है ----
हक़ीक़त आरजू फसाना ----
गुफ्तगू दिल की लब पे रुक गई - read more >>