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स्वाभिमान अहम् के रोग का निदान है !स्वाभिमान शब्द आत्मगौरव और आत्मसम्मान के लिए प्रयुक्त होता है। यह ऐसा शब्द है जो हमें जाग्रत करता read more >>
कागज और कलम एक दूसरे के जीवनसाथी हैं, जैसे कागज बिना कलम के अधूरा है, वैसे ही कलम बिन कागज के चलती ही नहीं. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
रंगों की अपनी है एक अलग पहचान, करता नहीं कोई इन का अपमान, हर बात किस्सों में आती है इनकी याद, कभी-कभी तो यह बन जाते हैं हर किसी के भी विवा� read more >>
किसी से भी उम्मीद तब तक होती है जब तक हमें हर चीज पाने की लालसा रहती है, जिस दिन लालसा खत्म उस दिन से उम्मीदें भी खत्म. लेखक पंकज कुमार ब� read more >>
माँ और बेटी का रिश्ता चाहे कितना भी प्यारा हो, लेकिन एक बेटी माँ बनकर भी अपनी माँ का दर्द नहीं समझ सकती. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
लोग गुण और अवगुण में से ज्यादा अहमियत गुणों को देते हैं, जबकि अवगुणों से ही सीख कर गुणों की परिभाषा समझी जाती है. लेखक पंकज कुमार बुड़ा read more >>
आहिस्ता आहिस्ता जिंदगी बीत रही थी, मन चंचलता में खेल रहा था। उम्र ने भी क्या खेल खेला जवानी की लालसा दिखाकर, बचपन को भी छीन रहा था। जीव� read more >>
14 अप्रैल का दिन बहुत ही खास दिन होता है क्यूंकि 14 अप्रैल को एक बाबा की जयंती है। बाबा का मतलब कोई पाखंडी साधु नहीं, जो सच में बाबा थे। मैं read more >>
गुरु और शिक्षा का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें आप हर दिन हर वक्त एक दूसरे से कुछ ना कुछ सीखते रहते हैं। लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
यह बात है जज्बातों की अच्छे एहसासों की, दुनिया का यह दस्तूर है चुप रहने वालों का ही कसूर है, करता नहीं कोई किसी का मान सम्मान, सब की अपन� read more >>
सड़क सुरक्षा कितना प्रासंगिक? मनुष्य मूलतः एक यायावर प्राणी है. यात्रा उसके जीवन की धूरी है. वह चाहे-अनचाहे बहुधा अपने जीवन का एक बड़� read more >>
मन के सच्चे, मनमौजी, अलमस्त बेगाना। नीचे सोते, बिस्तर से उठते, मां का जबरन नहलाना। मिठाई मन की मुराद, खाने की न देर। खिलौना पूंजी आगे, कह� read more >>
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