ऩजर को लगी ऩजर, दिखाई देते पर दोष।
खुद को तो मानता, गुण-रत्न का कोष।
दूसरों की उघाड़कर, खुद की ढकने का होश।
दूर की जलती सूझे, घर में जले तो read more >>
जो हर मोड़ पर रुक के मेरा इंतजार करते थे
वह आज एक नजर देख कर आगे बढ़े गए
रोना तो मेरी किस्मत में था
बस आंसू तब झलक गए
जब तब धूल डा ली साथी read more >>
ऐसे गांव की बात कुछ अलग ही है,, वह शहर से, बहुत ही अलग होता है,, अगर एक आदमी को कुछ हो जाए,, तो सारा गांव वाले दौड़ने लगते हैं,, अगर किसी के घर म� read more >>
** सुख और दुख **
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दुनिया में कहीं ना कहीं हर वस्तु का महत्व है कब कौन सी वस्तु अधिक महत्व रखती है यह हमें पता नहीं होता है और यह � read more >>