खुशिया भी मन को भाती ना
जब माँ की यादे आती ना
जब माँ अजल में सुलाती थी
वो बात भुलायी जाती ना
खुशिया भी मन को भाती ना
जब माँ की यादें आती � read more >>
जब से देखा तुझे जानू,
क्या हाले दिल कहूं।
सिवा तेरे कुछ सूझता ही नहीं,
अपना नाम तो बता_
अपने घर का पत्ता तो बता।
सोख हसीना तूं ,
बेख्याल � read more >>
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जहाँ टपका दुखी आँसू, वहाँ घायल हुआ शिक्षक ।
जहाँ टूटा सपन कोई, वहाँ पागल हुआ शिक्षक ।
दुखों की राह में जग को, अकेला छोड़ता है कब-
जहाँ दे� read more >>
एक बार "मैं" फिर से "मैं " होना चाहती हूं ...ना किसी की अपनी न किसी की पराई होना चाहती हूं.. इन अनजानी राह में खुद का "वजूद" ढूंढना च� read more >>