ललित दास निर्मोही 12 Aug 2026 शायरी दुःखद #ललित_दास_निर्मोही #Lalit_Das_Nirmohee #LalitDasNirmohee #HeartTouchingPoem #Heart_touching_shayari #दर्द_वाली_शायरी #अफवाह #जख़्म #शायरी #Best_Shayari #Best_Poem #Heart_Broken_Shayari 20678 2 5 Hindi :: हिंदी
हवा के साथ जो उड़ती है वो धूल होती है, मगर जो रूह को ज़ख्मी करे वो भूल होती है। किसी के अक्स को पल भर में राख करती है, ये अफवाह है साहब, जो ज़िंदगियाँ ख़ाक करती है। बिना आग के उठती ये लपटें घर जलाती हैं, मासूम की मासूमियत को सूली पे चढ़ाती हैं। न कोई दोष होता है, न कोई ज़ुर्म होता है, मगर बदनामी के साये में हर पल दर्द सोता है। भरोसे के सुनहरे धागे पल में टूट जाते हैं, बने-बनाए साये भी साथ छोड़ जाते हैं। तड़पती सिसकियों का जब सवेरा देख लेते हैं, ललित दास तब कलम से अपनी माथा टेक लेते हैं। ज़हर रगों में ऐसा ये खामोशी से भरती है, कि ज़िंदा लाश बनकर फिर जवानी आह भरती है। रोक लो इन जुबानों को जो ज़हर घोल देती हैं, अफवाहें अक्सर हंसते हुए घर उजाड़ देती हैं।
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