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शीर्षक (मेघराज) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) हे मेघराज कब तक आओ गे , कब हम पर अपनी कृपा बरसाओ गे। ऊपर से बरस रही है आग नीचे से धरती उगल र� read more >>
सिंदूरी साम में गोधूलि के पहरा बैलों के गले में बजता घंटी चौतरफा सोर गुल और तेरा इस तरह खमोशी से आजाना दम तोड़ता धीरे धीरे रौशनी प्� read more >>
मैंने सीखा है बहती नदियों से पर्वत चीर के राह बनाना जीव-जगत की प्यास बुझाकर पारावार में लीन हो जाना मैंने सीखा है दानी वृक्षों से अप read more >>
पेड़ -पौधे लगाओ, आक्सीजन बढ़ाओ, वातावरण को शुद्ध बनाओ। read more >>
वेज पुलाव बनाने के लिए हमे चाहिए पुलाव चावल 500 ग्राम, हर मटर 250 ग्राम, गाजर 2 से 3 , अदरक पेस्ट 2 चम्मच लहसुन का पेस्ट 2 चम्मच, तेल 6 बड़ी चम्मच, � read more >>
बक्त हैं की रुकता हैं दुःख हैं की टलता नहीं जख्म अभी तजा हैं एक समय है की बदलता नहीं सदियां गुजर गई कितनी घड़ियाँ गुजर गई न ये बदला म� read more >>
ये ऋ सुन तो दिल में कुछ तो होता हैं तुझे न देखु तो नैना बिचलित होता हैं ये ऋ सुन तो मुझ मे तू ही रहती हैं नहीं तो क्यों होता बेचैन मैं read more >>
पिअबा हमर रंगरेज पियेला बीड़ी ताड़ी जब अबेला घरबा करेला मन मानी रात भर सताबेला मांगेला बार बार पानी पिअबा हमर रंगरेज पियेला बीड़ी त� read more >>
देख के तुझे कितना सुकून मुझे मिलता है ये सिर्फ मैं जानता हूँ। हे तु क्या चीज,ये सिर्फ मैं जानता हूँ। हे तेरा क्या वजूद इस जहा मे ये सिर� read more >>
शीर्षक (वो बीते हुवे दिन) मेरे अल्फ़ाज़ सचिन कुमार सोनकर वो दिन बहोत याद आते हैं। जब माँ के गोद मे बैठ के खाना खाते थे । पिता के कंधे पर स्� read more >>
अजब दस्तूर हैं तेरा मेरे हुनर के मोल भी सूरत से लगाते हो मैंने खुद को गला दिया समय को पिघला दिया तब जा के मिला हैं मंजिल और एक तुम हो read more >>
तेरे आँगन का गुलमोहर कितना अच्छा लगता हे/ कहाँ से लिया तुमने इसको इसकी छाया को तो देखो मानो धरा में बदली का सूरज को ढकना सा इसके पत् read more >>
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