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अकेलेपन ने मुझे रुलाया है। पर रुलाते रुलाते बहुत कुछ सिखाया है। अकेलेपन ने मुझे रास्ते में भटकाया है, लेकिन राहगिरो को पहचानना भी � read more >>
अकेलेपन ने मुझे रुलाया है। पर रुलाते रुलाते बहुत कुछ सिखाया है। अकेलेपन ने मुझे रास्ते में भटकाया है, लेकिन राहगिरो को पहचानना भी � read more >>
🌺🍁🍁🌺🍁🍁🌺 हे वो मौजूद आज भी जो कभी कल नही था। वो जो कल आज है वो कभी कल नही था। आज के इस पल में जो है वो आज है,वो कल नही था। **** **** **** **** वो � read more >>
शीर्षक (मानवता) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) ना मन्दिर में ना मस्जिद में ना गिरजाघर में ना ही गुरुद्वारे में, मानवता दिखती है दिल के read more >>
डॉ अम्बेडकर जी 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 भारत मे बहुजनों को दिया जिसने सम्मान बाबा साहब के चरणो मे कोटि कोटि प्रणाम । किया जिसने आधुनिक read more >>
मैं सिर्फ लड़की हूँ, बेचारी नहीं। मैं माँ, हूँ लाचार नही। मैं पत्नी हूँ, पैर की जूती नहीं। मैं बेटी हूँ, बोझ नही। मैं शक्ति हूँ, कमजो� read more >>
आज बीते पल ने दस्तक दी कि भूल तेरी थी जिसे तू अपनी समझा वो चीज कभी ना तेरी थी अनछुए एहसास को छूने की कोशिश की छु ना सका उसे कोई लेकि� read more >>
ओ बीते दिनों की बातें मुझे रुलाती है बार - बार जाने कितना सताती है बार - बार भूल कर भूला न पाती हूं बार - बार एक बात दिल में रह - रहकर आती है read more >>
कविता "अद्भुत सावन" सावन मास बड़ा निराला। हां पल पल में घटाएं छाती।। थे बिन पानी मुरझाए चेहरे। कब धरती भी read more >>
किस्मत भी कभी - कभी क्या खेल खेलता है अपने ही अपनों को मारने का साजिश रचता है। धन्यवाद read more >>
शीर्षक (कविता कैसे बनती है?) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) कविता यूँ ही नही बन जाती है, कविता बनाने लिये के मूड बनाना पड़ता है। मन को शां read more >>
पिता परिवार की शान है, पिता से ही बच्चों को अभिमान है बच्चों की छोटी छोटी खुशियों में पिता का सारा जहान है। पिता के बिना सारी मिठाईयां read more >>
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