मैंने सपनों की छोटी सी गली में, तेरे नाम का दिया जलाया,
सोचा था सात फेरे ले कर, तुझे अपने घर ले जाऊँगा।
मन में था सीधा‑सादा सपना, तेरा हाथ read more >>
कहीं एक खालीपन था, जो भर नहीं पाया,
एक चेहरा अपना–सा था, जो सच में अपना बन नहीं पाया।
सुबह की पहली धूप में भी तेरी ही कमी सी लगी,
भीड़ के ब� read more >>
थक गया था दिल पुराने ज़ख्मों के हिसाब से,
फिर भी हर सुबह उठा किसी जज्बात से।
आँखों में सपने थे, हथेली में छाले थे,
रास्ते तो मुश्किल थे, � read more >>