#योग_हुआ
वो दिन था जैसे सहर नई,
मन में उजला संयोग हुआ।
सदियों का तप थम गया वहीं —
जब नयन मिला, योग हुआ।
तेरी हँसी,
मौन का कोई राग बनी,
जो � read more >>
करूँ मैं ज़िक्र उसी का, करूँ मैं फ़िक्र उसी का,
मेरी हर साँस में शामिल है असर सिर्फ़ उसी का।
उसी के नाम से रौशन है दिल की हर इक गली,
ज़मीं की � read more >>
सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को
तू है कामिल रचा-ए-हयात को
ये अर्ज़-ए-नियाज़-ए-मुहब्बत भी क्या है
बढ़ा दे तू अब मेहर-ओ-सौग़ात को
सलाम-ए-कायनात-ए-� read more >>
तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का,
गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है?
तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल,
नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है?
read more >>