अक्षय कुमार सिंह 05 Apr 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरे लिये तुम वही हो 14787 1 5 Hindi :: हिंदी
!तुम वही हो! मेरे लिए तुम वही हो, मेरी प्रत्येक प्रभात का निःशब्द सुकून। मेरी संध्या की थमी हुई थकान का विश्राम, और मेरी रात्रि के एकांत में उतरती शांति। तुम वही हो, जो शब्दों से परे होकर भी हर एहसास में बसे हो, मेरे मौन का अर्थ, और मेरी धड़कनों का स्थिर संगीत। तुम वही हो, जिसके होने मात्र से समय ठहर-सा जाता है, और अनुपस्थिति में हर क्षण एक अधूरी प्रतीक्षा बन जाता है। मेरे लिए तुम वही हो, जहाँ मेरी हर व्याकुलता को ठिकाना मिलता है, और मेरी हर बेचैनी को एक गहरा सुकून। तुम वही हो, मेरी प्रार्थनाओं की अनकही अभिलाषा, और मेरे विश्वास का सबसे कोमल आधार। मेरे लिए तुम वही हो, जिसमें मेरी हर कमी पूर्णता पा लेती है, जहाँ मेरी हर खामोशी बोल उठती है, और हर दुआ चुपचाप मुकम्मल हो जाती है… और शायद इसीलिए, मेरे हर ख्वाब की आख़िरी मंज़िल भी तुम ही हो, मेरे हर सुकून की वजह भी तुम ही हो— मेरे लिए तुम वही हो। मेरे लिए… तुम वही हो तुम कोई और नहीं मेरी बहन हो। . . . . . अक्षय सिंह (कसमरा,पूर्णिया, बिहार)
3 months ago