कविता- तुम्हारे लिये।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी- 21/01/2023
निवेदन- प्रस्तुत पंक्तियां नायक के ह्रदय की पीड़ा है एक कृतघ्न नायिका के लिये। read more >>
एक गांव में एक सरवन नाम का लड़का रहता था,,
बहुत ही सीधा और बहुत अच्छा था
गांव में उसके माता और पिता भाई और बहन लोग रहते थे ,, सरवन तीन भाई ए� read more >>
क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई !
क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले !
क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ?
जो मैंने read more >>
⭐ कविता = ( प्यार ढूंढ़ता है )
जिस्में मंडी में प्यार ढूंढ़ता है !
मुर्दों के सीने में जान ढूंढ़ता है !!
रोज़ लगती जहाँ प्यार की बोलियाँ !
उस � read more >>
( प्रथम अंतरा )
आवारा दिल चलता,
हवा के साथ गुनगुनाता।
सुर जो बनते तेरे ही नाम,
जहां में जहां-जहां चलता....(2)
आवारा दिल चलता,
हवा के साथ गुन� read more >>
शीर्षक ---- तुम से दूरी
तुम समय के साथ मुझसे
दूर होते गए !
न जाने क्यों ?तुम मजबूर होते गए !
बहुत खामोशी के साथl
मैंने रिश्तो को संभालना च� read more >>