स्वरचित रचना--- प्यार किया है तो..!
संदर्भ--- प्रेम ही ईश्वर है!
प्यार किया है तो ,
क्यों रिस्क से डरें।
मरना तो एक दिन है ही,
तो क्यों न इश्� read more >>
स्वरचित रचना--- क्यूं जले पर छिड़कते...!
संदर्भ- प्यार-मनुहार
क्यूं जले पर छिड़कते नमक हो प्रिये।
एक तो मारा हूं वैसे ही प्यार का,
दूजा त� read more >>
स्वरचित रचना--- किसी से कोई प्यार नहीं करे....!
संदर्भ---प्यार-मोहब्बत
दिल देता है रो-रो दुहाई,
किसी से कोई प्यार न करे!
बड़ी महंगी पड़ेगी ज read more >>
स्वरचित रचना--- सितारों की दुनिया से ...
संदर्भ- प्यार-मोहब्बत!
सितारों की दुनिया से चल करके कोई
मेरे दिल में आकर गया बस है कोई!
हजारों न� read more >>
क्यू रोता है ऐ-नीर, यहां पंख निकलते ही परिंदे उड़ान भरते है,
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भनक लगी है तेरी खनक की उन्हें, तभी वे दरिंदे कान भरते है,
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और ये जो रिश्तो के � read more >>
स्वरचित रचना---जिंदगी न सही,................!
संदर्भ---गम ए जुदाई
जिंदगी न सही, तू मौत ही बनकर आ जा।
आ मगर‌ आ,तू इक बार तड़प कर आ जा
आज बादल उमड़ पड़ read more >>