क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई !
क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले !
क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ?
जो मैंने read more >>
कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर.
लाकर मुझे खड़ा कर देती है!
जहां से मैं मुड़ ,कर पीछे देखना भी नहीं चाहती हूं
मगर वह गुजरा हुआ पल, वह अतीत ,हम� read more >>
आजकल हम बहुत शांत हो गए हैं
पर ऊपर से तो यह शांति सर्वविदित है
पर न जाने क्या मन में बहुत ही हलचल मची हुई है
जिसकी शोर से मैं अपने आप को � read more >>
बार-बार पता नहीं क्यों?
कुछ मैं लिखती हूं. फिर मिटाती हूं .न जाने क्या ?
मन की रहस्य को उजागर करना चाहती हूं "चाहती तो हूं कि लिख दूं 'अपन read more >>