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जिंदगी जीने की उम्र में जिंदगी से जुड़ी जिम्मेदारियों को निभाया मैंने ,निभाई है जिम्मेदारी जिंदगी के मस्ती भरे दिन में अब जिम्म read more >>
अलग -अलग तरहें की जरीन नक्काशी कढे़ वर्तन ,सिंगारदान खुद खाला के लड़के ने बनाई!तरह-तरह के रंगबिरंगें कांच लगे,महेरी,चौकी,फूलदान देने � read more >>
आखरी खत-1 उसने एक बार फिर बावर्चीखाने में बडे़ करीने से रख्खी लहसुन प्याज की टोकरी को उतारकर;उसमें रख्खें मल मल के कपडे़ के नीचे से चा� read more >>
मिलन... जागकर रात विताऊं , या ...यूहीं लौट जाऊं, कैसे कहूं ये चांदनी, तुझे कैसे पास बुलाऊं., तुझसे मिलने को आतुर मैं, खुद के साये से डर जाऊं read more >>
क्या? लिखूं कि ये शाम गुजर जाये,। सोचती ,हूँ, आंख ही बंद ,कर ,लूं, और ,ये ,हालात सुधर जाये,। बहुत,निहारा ,चाँद ,एक,। मजाल ,कि ,ये याद ,मिट ,जाये,� read more >>
विस्तार... कहीं किसी रोज उस किनारे के उस पार वजती है सुमधुर ध्वनि, र्कणप्रिय लिए विस्तार करती मन के संताप दूर शनै शनै...! जब भी उठती ह्द� read more >>
तुम्हारे हिस्से की वह हरी,पीली, लाल, काली,चूड़ियों के वे टुकडे़ आज भी रखे है ...! तुम्हारे लिए... जिनके लिए तुम लड़जाया करती थीं, अपने तेज read more >>
ढलती शाम...शीर्षक कौतुहल से दूर ढलती संध्या , समेटती प्रकृती अपने करतलों को...! घर जातीं गाय धूल उडा़ती , बछडो़ को पाने सुख रभांती ..! आसम� read more >>
लड़का:- उफ़्फ़ क्या दिलकश नज़ारा हैं कितना प्यारा अच्छा लगता है बरसात के बूंदें हल्का - हल्का हल्का - हल्का धूप उफ़् read more >>
मुफ्त मिली हुई हर चीज तुम्हें सिर्फ दर्द देगी लेकिन खुशी नही जिसे मोहब्बत कहते है। read more >>
जमीन से आसमा तक सिर्फ तुम्हें खुदा ही पहुंचा सकता है।लेकिन लोग तुम्हें नीचे से उपर नही डायरेक्ट उपर भेज देंगे। read more >>
तुम अपना हक तुम खुद ही हासिल करो कोई तुम्हें देना नही चाहेगा।क्योंकि यहां बिना मांगें लोग फकीर को पैसा नही देते है तो तुम्हारी हक तु� read more >>
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