न शौक, न श्रृंगार ,न इच्छा न चाह हो,
न दु:ख हो न दर्द हो,कठिन भले ही राह हो,
तेरे बिना रहना कैसा?भाये भला तनहाइयां?
बनकर सदा चलता रहूं ,अमिट � read more >>
आंसू एक ही होते हैं, दर्द सबका अलग अलग होता है,
कोई अपने के लिए रोता है,
कोई गैरों के लिए रोता है,
किसी का कोई खो जाता है,
किसी का कोई बिछड़ read more >>
बहुत कुछ कहा
उस सिमटे लफ्ज़ ने,
जैसे सिलबट्टे आ गई हो सोच पर,
धीरे धीरे उम्र ढलती गई,
जाने कैसे फिर भी वही बात चलती हुई,
खामोश बातो को फि� read more >>