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भूला नहीं हूँ तुमको पर जानो मेरी मजबूरी मैं बस तुमको चाहता हूँ कहना नहीं ज़रूरी मैं तेरी दो बाहों में अब चाहे ना सिमट पाऊँ रूहों के बी� read more >>
हे नाथ क्या करूं , तू ही बता एक परफेक्ट बीवी कैसे बनू ,मेरी गलती क्या है अपने पति को किसी और के पास जाने से रोकने की कोशिश या फिर अपने पति स read more >>
आराध्या तेरी प्यारी सी मुस्कान तू हम सब की जान पापा की प्यारी मम्मी की दुलारी भाईयो का मान तू बहनों की शान बड़े पापा की नटखट बड़ी मम read more >>
दिल पर आकर लगती थी जब भी वो कुछ कहती थी। और हर बात पर यही कहती थी कि तुम अब बदल गए हो।। -दिनेश कुमार कीर read more >>
मैं बिकने तक को राजी था उसके प्यार के बाजार में नजरें लड़ने तक की तो आस थी ही पर कमवख्त उसने नजर तक नहीं फैरी शायद उसे नहीं खबर कि हमेश read more >>
"गम" "इस जहान में गम न होता तो,शराबें महखानों का क्या होता,बोतलें खाली होती,हाथों में जाम न होता,लबों पर उनका नाम न होता,निगाहों में उनके � read more >>
प्रेम ( पति - पत्नी का )  एक साहूकार जी थे उनके घर में एक गरीब आदमी काम करता था । जिसका नाम था । मोहन लाल जैसे ही मोहन लाल के फ़ोन की घंटी बजी read more >>
किस किस से जाकर कहती ख़ामोशी का राज, अपने अंदर ही ढूंढ रही हूँ अपनी ही आवाज। -दिनेश कुमार कीर read more >>
चाहतें भी नफ़रतें भी क्या ये झमेला है। ज़िन्दगी बस चार दिन का ही तो मेला है।। मुश्किलों में साथ देता कौन अब किसके। हर कदम पर शख़्स वो ख़ुद � read more >>
यह मोहब्बत है ठगों की बस्ती, एक पल में बदल देती है हस्ती; आशिक़ रहते है इश्क़ में बैचेन, इश्क़ जाता है उजाड़ कर बस्ती...! read more >>
पढ़ लेती है मेरे मुख को, सुन लेती है मौन दुख को, रूठे रूठे से सुख को, मना मना कर लाती है... जाने कहां से 'मां' हुनर लाती है...! read more >>
एक नजर ,जब उसे देखा हल्की सी हंसी , होठों पर ठहर गई ।। जिन्दगी के कुछ बिते पलो को जब याद कर ,पन्नों पर कुछ कुतेरने लगे । घीरे-घीरे वो काग� read more >>
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