"जिंदगी"
"जब कभी जिंदगी से हारने लगता हूँ,और खुद को अकेला पाता हूँ,तो कहीं रुक कर ओठों के ताज को सुलगा लेता हूँ,एक लंबा कश लेकर धुऐं के साथ read more >>
आज फिर मेरी जुवा लड़ खराने लगी है, उसकी यादे दिल को अंदर हि अंदर जलाने लगी है।धुंआ धुंआ सा मंजर आँखों पे छाने लगी है, लव भी उसी कि गीत गुनग� read more >>
क्या कहु ये आँखे क्यू तु आज भी रोता है, जब दर्द अपनो ने ही दिया है फिर क्यो पिरोता है।कुछ तो मजबूरिया होगी उनकी भी जो तुझे दर्द दे गया, उस � read more >>
पल पल-
गुज़रते ए-जिंदगी,
के पल हर पल पल पल...
ना जाने कब साथ-
छोड़ेंगे ज़िंदगी के ए-पल...
जिसे गुज़र-
जाना ए-महोब्बत,
जिंदगी से क्यों किया read more >>
मीत मेरे मीत-
आ जा बीते ना ए-पहर,
पुकारे ये प्रीत-
आ जा बीते ना ए-पहर,
आ लौट के आ मेरे
मीत बीते ना ये दिन-ए-रैन,,
आ तुम बिन-
सूना है ये मन-म� read more >>
#बहर:-122 , 122, 122
#काफिया:-ई
#रदीफ़:- कहानी
ग़ज़ल
हमारी अधूरी कहानी,
बनी है गजब ही कहानी.
कहूँ जो इसे तो सुने सब,
सकूं ले करारी कहानी.
हम� read more >>