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(दोहा छंद) भटक रहा मन बावरा,सच्ची झूठी बात। सब इसका ही देन है,काली पीड़ित रात।। भटक रहा मन बावरा,रहता कभी न शांत। होता है तब शांत यह,थक� read more >>
धूप की रंगत तो देखो........... ऐसा लगता है और चढ़ेगी तिलिस्मि काम है इसका इंसान सुखा होगा तो भिगा देगी..... बीती शाम तो चली गयी नहीं पकड़ पाया read more >>
चलो फिर से थोड़ा जी लें खुशियों को ख़ुशी भर जी लें चलो उस लम्हो को सच कर लें निर्दोष पल को निर्दोष बन जी लें वो कल बड़ा ही अजीब था मगर खु� read more >>
In the tapestry of life, relationships are the delicate threads that weave our experiences into a meaningful whole. They are the colors that paint our journey, the melodies that fill our hearts, and the mirrors that reflect our true selves. At the core of these connections lies a profound truth: if you have the courage to express your innermost tho read more >>
ए जिंदगी मुझको तू बस इतना तो बता दे रहती है कहा तू अपने उन गलियों का हमको पता तो बता दे कभी इस गली तो कभी उस गली में हर घडी ढूढता रहा मैं � read more >>
हर हाल में दिल में खुशियाँ ही खुशियाँ रहे, सदा ही होठों पे विराजमान बहार रहे। हाथों में कुछ निर्माण करने की कला भी रहे, कदमों में गज़ब � read more >>
(दोहा छंद) सबका मालिक एक है,अलग अलग है नाम। इनमें उलझें मत कभी,पूजा जाता काम।। सबका मालिक एक है,सृष्टि सकल के यार। जितना ढूंढों अन्त म� read more >>
घर से निकल आए घर के लिए पैसे कमाने। कई रूप देखे कई सवाल यहां के जमाने। परिश्रम रंग लाया पाया मैंने यहां सबकुछ _ हरेक रत्नों से भरा है आ� read more >>
हरी चुनरिया ओढ़कर,धरती लगती खूब। सावन जल बरसे अभी,चमक रही है दूब। काले बादल मस्त है,वसुंधरा है मग्न_ जो देती है अति खुशी,चाह सभी मंसूब। read more >>
(मुक्तक छंद) क्या हो गया आज लोगों को बात _बात में लड़ जाते हैं। ईर्ष्या की आग में जलकर लोग स्वयं भस्म हो जाते हैं। खुद मत जलें भाइयों इस � read more >>
"मतलबी होना तो इंसान की फितरत है साहब" "बारिश रुक जाने के बाद छतरी भी बोझ लगने लगती है" आजकल तो वस्तु शुद्ध नहीं मिलती इंसान तो दुर की बात read more >>
नारी झुकती नहीं किसी के आगे, पर बिछ जाती है अपनों के आगे । अपने सपनो को पलकों से उतरने देती ही नही, दूसरो को खुशी देने के लिए, दबा देती ह� read more >>
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