संदीप कुमार सिंह 09 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 36251 1 5 Hindi :: हिंदी
(मुक्तक छंद) क्या हो गया आज लोगों को बात _बात में लड़ जाते हैं। ईर्ष्या की आग में जलकर लोग स्वयं भस्म हो जाते हैं। खुद मत जलें भाइयों इस ईर्ष्या को जला कर मार डालें_ आपसी तालमेल से समाज अनुपम स्वर्ग बन जाते हैं। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
2 years ago
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....