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संसार-माया से संसार है सबका अपना दाम
कुंडलिया दिवस माया से संसार है,सबका अपना दाम। खुद को तुम अति योग्य कर,करिए सुंदर काम।। करिए सुन्दर काम,समाँ रौशन तब रहता। छोड़ें कभी
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माया-माया में सब लीन है भूल गए हैं मूल्य
कुंडलिया छंद माया में सब लीन है,भूल गए हैं मूल्य। सब रह जायेगा यहीं,जाओगे बन शून्य।। जाओगे बन शून्य,जन्म ले फिर से आना। फिर माया में फ�
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पानी अदभुत तत्व है-करिए हद में खर्च
कुंडलिया छंद पानी अदभुत तत्व है,करिए हद में खर्च। तभी धरा गुलजार हो,नित्य करें नव सर्च।। नित्य करें नव सर्च,बनें ज्ञानी का साथी। फैल�
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पानी-पानी है अनमोल धन
कुंडलिया छंद पानी है अनमोल धन,करें नहीं बेकार। बिन पानी सब शून्य है,तन मन हो बेजार।। तन मन हो बेजार,जहां ये नीरस होता। रखें याद यह बात,�
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दिल से दिल यूं मिल गए- हुए मजहबी एक
कुंडलिया छंद दिलसे दिल यूं मिल गए, हुए मजहबी एक। मानवता है चरम पर, फिर भी रूप अनेक।। फिर भी रूप अनेक,दिव्य अदभुत यह माया। मानव चलिए नित
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बेटी क्या है -आंगन की छन छनाती पायल है बेटी
आंगन की छन छनाती पायल है बेटी, घर का अभिमान है बेटी, मां का स्वाभिमान है बेटी, पापा की आंखों की मुस्कान है बेटी, भाई का प्य
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अच्छे कर्म पर कविता-हार कर हालात से न हार होना चाहिए
हार कर हालात से,न हार होना चाहिए हार कर हालात से,न हार होना चाहिए कंटकों से पथ भरा,स्वीकार होना चाहिए क्या करेगी आंधियां,तुफान भी हो
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तीर निशाने पर लगा-जगा अधिक विश्वास
दोहा छंद तीर निशाने पर लगा,जगा अधिक विश्वास। और किया मैं साधना,पूर्ण हुए सब आस।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(�
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खुशहाली का राज है-रहें व्यस्त जो जीव
दोहा छंद खुशहाली का राज है, रहें व्यस्त जो जीव। रहते हैं वे स्वस्थ भी,साधन मिले अतीव।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त�
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महिमा तेरी खूब है-जाने सब संसार
दोहा छंद महिमा तेरी खूब है,जाने सब संसार। माँ तेरे उपकार से, जीवन में है प्यार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द
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चिड़िया बैठी डाल पर-पुष्प भरे हैं प्यार
दोहा छंद चड़िया बैठी डाल पर, पुष्प भरे हैं प्यार। नव चाहत मन में लिए,निभा रही किरदार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त
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भोली सूरत देखकर-उलझन भागा दूर
दोहा छंद भोली सूरत देखकर,उलझन भागा दूर। नयन नयन से मिल गए,मस्ती में मैं चूर।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देव�
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