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प्यार दिलो जान से करता हूं-प्यार तो प्यार है
प्यार- दिलो जान से करता हूं..! प्यार तो प्यार है,, नफरत- से भी यारी निभाता हूं...!!! -मोती
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मैं अपने अंदाज़ का मालिक हूं यारों
मैं अपने अंदाज़- का मालिक हूं यारों..! दिल-दरिया है मेरा,, इसलिए भी- ईमान वालों का मित्र हूं...!!! -मोती
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गुज़रे हुए लम्हों से-चुनता हूं वह ख़ूबसूरत पल
गुजरे- हुए लम्हों से,, चुनता हूं- वह ख़ूबसूरत पल,, सजाता हूं- ज़िंदगी की किताब में...!!! -मोती
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मेहनत-मेहनत का फल
जब मेहनत का फल ना मिले, तब मेहनत करने वाले का दिल टूटे, इस बात से दुनिया वाले नहीं है अछूते। फिर मेहनत करने वाले को फल क्यों देते हैं अधू
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कलियुग के इंसान में-मची भयंकर होड़
दोहा छंद कलियुग के इंसान में,मची भयंकर होड़। भागम भाग विशेष है,दिखते हैं बेजोड़।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपु
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सपने सारे तब खिले-जीवन हो शहतूत
दोहा छंद सदा असन चित से करें,रहे वदन मजबूत। सपने सारे तब खिले,जीवन हो शहतूत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देव�
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नयनों की सीमा रहे-मिले खुदबखुद प्यार
दोहा छंद नयनों की सीमा रहे,मिले खुदबखुद प्यार। करते तब इजहार भी,फिर होता स्वीकार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप
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राधा माधव एक हैं-कभी नहीं ये अन्य
दोहा छंद राधा माधव एक हैं, कभी नहीं ये अन्य। एक जान दो तन रहे, जो करते हैं धन्य।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(दे
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हर मुश्किल आसान हो-सदा करें जब यत्न
दोहा छंद हर मुश्किल आसान हो,सदा करें जब यत्न। खुशियाँ जीवन में रहे, लगे परिवार रत्न।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्त�
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मौसम-हमें भींगाने आया है
बेकरार हुआ मौसम एकरार करने आया हम खुशनशीव है,वो हमें भींगाने आया है काली घांटा छा रही बादल हवाओ ने दौडाया कहीं पडती छोटी बुँदे जमीं
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धरती ने धारण किए-हीरा पन्ना रत्न
(दोहा छंद) धरती ने धारण किए, हीरा पन्ना रत्न। सर्व खनिज से पूर्ण हैं,पाने को कर यत्न।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्ती�
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रहें साफ दृढ़ वास्तविक-जिएं न्याय के साथ
(दोहा छंद) रहें साफ दृढ़ वास्तविक, जिएं न्याय के साथ। कर खंडन अन्याय का, लें यश अपने हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_सम�
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